Friday, January 16, 2026
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तेज प्रताप का दही-चूड़ा भोज: सियासत का मंच, परिवार की खामोशी और नए संकेत

राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने इस बार मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित दही-चूड़ा भोज को सिर्फ पारंपरिक आयोजन नहीं रहने दिया, बल्कि इसे पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया। इस भोज पर न केवल राज्य की तमाम राजनीतिक दलों की नजरें टिकी थीं, बल्कि सबसे बड़ा सवाल यही था कि लालू परिवार के कौन-कौन से सदस्य इसमें शिरकत करते हैं—खासकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आते हैं या नहीं।

भोज में लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया, लेकिन तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी ने सियासी हलकों में अटकलों को और हवा दे दी। सवाल उठने लगे कि क्या तेजस्वी यादव एक अहम राजनीतिक मौका चूक गए?

सत्ता और विपक्ष—दोनों खेमों की मौजूदगी

तेज प्रताप यादव के भोज की सबसे अहम बात यह रही कि इसमें सत्ता और विपक्ष, दोनों खेमों के दिग्गज नेता शामिल हुए। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, जदयू के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी, आरएलजेपी प्रमुख पशुपति पारस जैसे नेता इस आयोजन में पहुंचे।
लेकिन इन तमाम चेहरों के बीच तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति सबसे ज्यादा चर्चा में रही

वर्षों बाद साधु यादव की वापसी

इस भोज ने पारिवारिक स्तर पर भी कई संकेत दिए। लंबे समय बाद तेज प्रताप यादव के मामा साधु यादव और प्रभु नाथ यादव एक ही मंच पर नजर आए। साधु यादव ने खुले मंच से परिवार के एकजुट होने की बात कही, जिसे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

शिवानंद तिवारी की पोस्ट ने बढ़ाई सियासी हलचल

राजद के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने इस भोज को लेकर एक भावुक और तीखी टिप्पणी की। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि “आज दही-चूड़ा भोज पूरी तरह राजनीतिक रंग में डूबा है। इस रंग में अगर कोई सराबोर दिख रहा है, तो वह तेज प्रताप है। तेजस्वी पूरी तरह ओझल हैं। 10 सर्कुलर रोड पर सन्नाटा है।”

उन्होंने आगे लिखा कि चुनाव परिणाम से हताश कार्यकर्ताओं को आज सबसे ज्यादा संबल की जरूरत थी, लेकिन जब नेता ही मैदान में नहीं दिखे, तो कार्यकर्ताओं को ऊर्जा कौन देगा?

दही-चूड़ा और बिहार की राजनीति

बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज का इतिहास रहा है। रिश्ते बनते-बिगड़ते रहे हैं। साल 2017 में लालू प्रसाद द्वारा नीतीश कुमार को दही का टीका लगाना आज भी लोगों को याद है। तब लगा था कि गठबंधन अटूट है, लेकिन छह महीने बाद ही तस्वीर बदल गई।
साल 2024 में भी जब नीतीश कुमार ने राजद के दही-चूड़ा भोज में शिरकत की थी, तब राजनीतिक बयानबाजी पर विराम लगा था।

तेज प्रताप का तंज और लालू का संदेश

जब मीडिया ने तेज प्रताप यादव से तेजस्वी की गैरमौजूदगी पर सवाल किया, तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “उन्हें जयचंदों ने घेर रखा होगा” और यह भी जोड़ा कि तेजस्वी देर से उठते हैं, वह रात नौ बजे तक उनका इंतजार करेंगे।

वहीं लालू प्रसाद यादव ने साफ शब्दों में कहा कि तेज प्रताप से कोई नाराजगी नहीं है और परिवार साथ रहेगा। यह बयान भविष्य की राजनीति के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।

एक्स पोस्ट में भी दिखी खामोशी

भोज के बाद तेज प्रताप यादव ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर भावुक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने अपने पिता के आगमन को आशीर्वाद बताया। लेकिन इस पूरे पोस्ट में तेजस्वी यादव का नाम तक नहीं लिया गया
दिलचस्प बात यह रही कि लालू प्रसाद यादव ने भी सार्वजनिक रूप से तेजस्वी का जिक्र नहीं किया।

तेज प्रताप यादव का यह दही-चूड़ा भोज सिर्फ एक पारंपरिक आयोजन नहीं रहा। यह राजनीतिक पुनरागमन, पारिवारिक समीकरणों और आने वाले चुनावी संकेतों का मंच बन गया।
जहां तेज प्रताप पूरी तरह केंद्र में नजर आए, वहीं तेजस्वी यादव की चुप्पी और गैरहाजिरी कई सवाल छोड़ गई। बिहार की राजनीति में यह आयोजन आने वाले दिनों में नए समीकरणों की भूमिका लिखता दिख रहा है।

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