इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज़ (ILBS) के 16वें स्थापना दिवस समारोह में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने राजधानी में लिवर स्वास्थ्य के सुधार के उद्देश्य से “दिल्ली मॉडल फॉर हेल्दी लिवर” का औपचारिक शुभारंभ किया। संस्थान के परिसर में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शोधकर्ता, चिकित्सक, छात्र और कर्मचारी मौजूद थे। यह कदम राजधानी में बढ़ते लिवर रोग के बोझ से निपटने और जन-स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
उद्घाटन और संस्थान को समर्थन
सभा में बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने ILBS की निरंतर सेवाओं, अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य में योगदान की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार संस्थान के मिशन को पूरा करने में पूर्ण और अटूट समर्थन देगी। मंत्री ने कहा कि ILBS केवल दिल्ली के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक आदर्श संस्थान बन चुका है — इसके डॉक्टर, नर्सें, वैज्ञानिक और कर्मचारी समर्पण तथा उत्कृष्टता का परिचय देते हैं।
सालाना रिपोर्ट: उपलब्धियाँ और आँकड़े
आईएलबीएस के निदेशक-सह-कुलपति डॉ. एस.के. सरीन ने वर्ष 2025 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में संस्थान की शैक्षणिक प्रगति, अनुसंधान एवं चिकित्सकीय उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख था। डॉ. सरीन ने गर्व के साथ बताया कि पिछले वर्ष संस्थान में लगभग 1,60,000 से अधिक मरीजों का इलाज हुआ, 11,000+ आपातकालीन मामलों का प्रबंधन किया गया और 162 लिवर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए गए। उन्होंने पूरे आईएलबीएस परिवार — चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और प्रशासन — के समर्पण के लिए धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि यही समर्पण संस्थान की प्रगति का मूल स्रोत है।
दिल्ली मॉडल फॉर हेल्दी लिवर — उद्देश्य और आवश्यकता
“दिल्ली मॉडल” फैटी लिवर रोग और अन्य नॉन-कम्यूनिकेबल लिवर बीमारियों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए एक समग्र, निगमित जन-स्वास्थ्य प्लेटफ़ॉर्म है। मॉडल विशेषकर उन नीतियों और कार्यक्रमों पर केन्द्रित है जो:
रोग का समय रहते पता लगाने व उपचार में तेजी लाने,
रोकथाम और जीवनशैली में स्थायी सुधार को बढ़ावा देने,
आवश्यकता पड़ने पर उन्नत रेफरल एवं विशेषज्ञ देखभाल सुनिश्चित करने में मदद करें।
इस पहल का एक लक्षित अनुमान यह भी है कि लगभग एक-तिहाई वयस्कों में फैटी लिवर के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए व्यापक परीक्षण, जागरूकता और प्रबंधन रणनीतियाँ लागू की जाएँ।
मॉडल के प्रमुख घटक (विस्तृत)
दिल्ली मॉडल निम्न मौलिक घटकों पर आधारित है — हर घटक की महत्वपूर्ण भूमिका और क्रियान्वयन-रूपरेखा के साथ:
1.जागरूकता अभियान
मोटापा, अनियमित आहार, शराब का दुरुपयोग और वायरल हेपेटाइटिस जैसे जोखिम-कारकों के बारे में व्यापक जन-जागरूकता।
मीडिया, मोहल्ला-केंद्र, स्कूल और कार्यस्थल पर लक्षित संदेश, वांछित व्यवहार परिवर्तन के लिए स्थानीय भाषाओं में सामग्री।
2.स्क्रीनिंग और प्राथमिक देखभाल में एकीकरण
प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वसायुक्त यकृत (fatty liver) की जांच और जोखिम मूल्यांकन के प्रोटोकॉल लागू करना।
प्राथमिक स्तर पर नॉन-इनवेसिव परीक्षणों व साधारण एल्गोरिदम से जोखिम पहचान कर जीवनशैली पर सलाह देना।
3.रेफरल नेटवर्क और केन्द्रित सेवाएँ
मोहल्ला क्लीनिकों और जिला अस्पतालों से उच्च स्तरीय मेडिकल सेंटरों/आईएलबीएस जैसी संस्थाओं तक व्यवस्थित रेफरल प्रोटोकॉल।
रेफरल के लिए स्पष्ट मानदंड, तेज ट्रायेज और टाइम-बाउंड अप्रवेश सुनिश्चित करने वाले मैकेनिज़्म।
4.रिस्क-आधारित निगरानी व कार्रवाई एल्गोरिदम
जोखिम के अनुसार रोगियों का वर्गीकरण — निगरानी, जीवनशैली हस्तक्षेप, या विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता।
डेटा-आधारित सेंट्रल मॉनिटरिंग प्लेटफ़ॉर्म जहां से नीति निर्माताओं को रियल-टाइम इनपुट मिल सके। 
5.जीवनशैली संशोधन कार्यक्रम
पोषण परामर्श, नियंत्रित व्यायाम योजनाएँ, धूम्रपान/शराब रोकथाम सत्र और व्यवहार परिवर्तन-समर्थन (behavioral counselling)।
समुदाय में ग्रुप-सेशन्स, डिजिटल कोचिंग और प्राथमिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से दीर्घकालिक पालन (adherence) सुनिश्चित करना।
6.मूल्यांकन, डेटा-आधारित नीति सुधार और विस्तार योग्यता
निरंतर मूल्यांकन-फ़्रेमवर्क जिससे प्रभाव का आंकलन, लागत-लाभ विश्लेषण और आवश्यकता अनुसार मॉडल का स्केल-अप संभव हो।
डेटा गोपनीयता और गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए पब्लिक-हेल्थ निर्णयों के लिए साक्ष्य उपलब्ध कराना।
लिवर ज्ञान — जनसहायता पहल
स्थापना दिवस पर ILBS ने “लिवर ज्ञान” नामक जनसहायता पहल भी शुरू की। इसका उद्देश्य आम जनमानस में लिवर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मिथकों का खंडन करना और समय पर उपचार हेतु मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। यह पहल सटीक, साक्ष्य-आधारित जानकारी, साधारण भाषा में स्वास्थ्य संदेश और प्राथमिक स्तर पर प्रश्नोत्तर/परामर्श के माध्यम से लोगों तक पहुँचेगी।
क्रियान्वयन चुनौतियाँ और संभावनाएँ
दिल्ली मॉडल की सफलता के लिए कुछ मुख्य चुनौतियाँ और अवसर समान रूप से महत्वपूर्ण होंगे:
चुनौतियाँ: समुदाय स्तर पर व्यवहार परिवर्तन लाना, प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली में आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधनों का प्रावधान, तथा डेटा-इंटीग्रेशन की तकनीकी व प्रशासनिक जटिलताएँ।
अवसर: यदि मॉडल सफल रहा तो यह न केवल दिल्ली बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर स्केल-अप के लिए एक नमूना बन सकता है — जससे फैटी लिवर और संबंधित बीमारियों के बोझ में सार्थक कमी आ सकती है।
समापन
ILBS के 16वें स्थापना दिवस पर शुरू किया गया “दिल्ली मॉडल फॉर हेल्दी लिवर” एक बहुआयामी और सबूत-आधारित पहल है, जो जागरूकता, समय पर पहचान, प्राथमिक देखभाल में सशक्तीकरण और विशेषज्ञ रेफरल को जोड़ती है। स्वास्थ्य मंत्री के समर्थन और ILBS की क्लिनिकल-शैक्षणिक विशेषज्ञता के साथ यह पहल दिल्ली में लिवर स्वास्थ्य सुधार के मार्ग पर एक ठोस कदम साबित हो सकती है — और यदि चाहा जाए तो पूरे देश के लिए एक मॉडल भी बन सकती है।














