Friday, January 16, 2026
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दिग्विजय सिंह की पोस्ट ने बढ़ाया सियासी तापमान, संगठन की ताकत पर खुली बहस

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने शनिवार को देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी। दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जनसंघ–भाजपा की मजबूत संगठनात्मक संरचना का उदाहरण बताया।

दिल्ली में कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले आई इस पोस्ट को केवल एक तस्वीर साझा करने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संगठन और नेतृत्व पर एक गहरे राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

दिग्विजय सिंह ने लिखा कि यह तस्वीर उन्हें Quora पर मिली और उन्हें बेहद प्रभावशाली लगी। उन्होंने कहा—
“RSS का एक जमीनी कार्यकर्ता, जो कभी नेताओं के पैरों में बैठता था, उसी संगठनात्मक ताकत के दम पर पहले राज्य का मुख्यमंत्री और फिर देश का प्रधानमंत्री बना। यही किसी संगठन की असली शक्ति होती है।”

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी राजनीतिक दल की वास्तविक मजबूती उसके कैडर, अनुशासन और निरंतर जमीनी मेहनत से आती है।

‘यह प्रशंसा नहीं, विश्लेषण है’—दिग्विजय सिंह की सफाई

पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर मिली तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच दिग्विजय सिंह ने अपनी मंशा साफ की। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में लिया गया है।
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया—
“मैंने न तो RSS की तारीफ की है और न ही नरेंद्र मोदी की। मैं संगठन की भूमिका पर बात कर रहा हूं। मैं RSS और मोदी दोनों का घोर विरोधी हूं और अपनी बात पर कायम हूं।”

दिग्विजय सिंह की पोस्ट ने बढ़ाया सियासी तापमान, संगठन की ताकत पर खुली बहस

उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत करने की बात करना किसी विचारधारा का समर्थन नहीं, बल्कि राजनीतिक यथार्थ को स्वीकार करना है।

कांग्रेस के संगठन पर भी उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने इसी क्रम में कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक सुधारों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने राहुल गांधी को टैग करते हुए कहा कि सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर राहुल गांधी की समझ मजबूत है, लेकिन अब समय आ गया है कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर गंभीरता से काम किया जाए।

उन्होंने लिखा कि जिस तरह देश में चुनाव आयोग में सुधारों की चर्चा हो रही है, उसी तरह कांग्रेस में भी संरचनात्मक बदलाव अब टाले नहीं जा सकते। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने संगठन सृजन की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन पार्टी को और अधिक व्यावहारिक, विकेंद्रीकृत और जमीनी बनाना जरूरी है।

भाजपा का जवाब: ‘यही हमारी कार्यसंस्कृति है’

दिग्विजय सिंह के बयान पर भाजपा की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भाजपा की पहचान ही यही है कि एक सामान्य कार्यकर्ता भी अपनी मेहनत और क्षमता के बल पर शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकता है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा—
“नरेंद्र मोदी गुदड़ी के लाल हैं, जबकि राहुल गांधी जवाहर के लाल हैं।”
उन्होंने आगे दावा किया कि राहुल गांधी की समझ पर केवल दिग्विजय सिंह ही नहीं, बल्कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी सवाल उठा चुके हैं।

संगठन बनाम नेतृत्व की बहस फिर तेज

दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में संगठन और नेतृत्व की भूमिका पर बहस को तेज कर दिया है। यह बहस केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी आत्ममंथन की मांग को उजागर करती है—कि क्या पार्टी बिना मजबूत संगठन के चुनावी चुनौती का सामना कर सकती है?

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VIKAS TRIPATHI
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